यह बड़ी सफलता डीसीपी भावेश रोजिया के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम ने हासिल की है।
छह से ज्यादा राज्यों की पुलिस को थी तलाश
आरोपी आबिद अली सात से अधिक राज्यों—मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल—में वॉन्टेड था। पिछले महीने भोपाल के कुख्यात ‘ईरानी डेरा’ इलाके में पुलिस रेड के दौरान वह कथित तौर पर पत्थरबाजी कर मौके से फरार हो गया था। इसके बाद पुलिस को इनपुट मिला कि वह सूरत में अपने साले के घर छिपा हुआ है। पुख्ता सूचना के आधार पर सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे धर दबोचा।
नाम बदलना था अपराध की रणनीति
पुलिस के मुताबिक आबिद अली ‘ईरानी डेरा’ गैंग का मास्टरमाइंड है और लंबे समय से भोपाल से आपराधिक नेटवर्क चला रहा था। वह डकैती, धोखाधड़ी और आगजनी जैसे कई संगीन अपराधों में शामिल रहा है। उस पर MCOCA जैसे सख्त कानूनों के तहत भी केस दर्ज हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने जानबूझकर ‘रहमान डकैत’ नाम अपनाया था, ताकि लोगों में डर पैदा हो और अपराध की दुनिया में उसका रुतबा बना रहे। हर गिरफ्तारी के बाद पहचान बदलना और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करना उसकी प्रमुख कार्यशैली (मोडस ऑपरेंडी) रही है, जिससे वह सालों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
डीसीपी भावेश रोजिया फिर चर्चा में
रहमान डकैत को हथकड़ी पहनाकर पेश करने वाले डीसीपी भावेश रोजिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। रोजिया ने वर्ष 2004 में गुजरात पुलिस में PSI के रूप में सेवा शुरू की थी। लगातार प्रमोशन के बाद वे डिप्टी एसपी, एसीपी और अब डीसीपी के पद तक पहुंचे।
अपने करियर में उन्होंने गांधीनगर सीरियल किलर केस सुलझाने के साथ-साथ ड्रग्स की कई बड़ी खेपें पकड़ी हैं। इन मामलों में पाकिस्तानी, ईरानी और अफगानी नागरिकों की गिरफ्तारी भी शामिल रही है। कर्तव्यनिष्ठा और सख्त कार्रवाई के लिए भावेश रोजिया को गुजरात के तेजतर्रार और कर्मठ पुलिस अधिकारियों में गिना जाता है।
फिलहाल, सूरत पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और उसके आपराधिक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।