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EU में सोशल मीडिया पर अनिवार्य ID वेरिफिकेशन की पहल, आयरलैंड उठाने जा रहा बड़ा कदम

Published on: January 1, 2026
Mandatory on social media in EU

द देवरिया न्यूज़, आयरलैंड यूरोपियन यूनियन (EU) में एक बड़े और अहम बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अपनी आगामी EU प्रेसिडेंसी के दौरान आयरलैंड पूरे यूरोप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अनिवार्य ID वेरिफिकेशन लागू कराने की पहल करेगा। इस कदम का मकसद फर्जी अकाउंट्स, बॉट्स, ऑनलाइन नफरत और गाली-गलौज पर रोक लगाना है।

First Post की रिपोर्ट के अनुसार, आयरलैंड के डिप्टी प्रधानमंत्री साइमन हैरिस और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने सोशल मीडिया पर पहचान सत्यापन के मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।

ID वेरिफिकेशन को क्यों जरूरी मान रहा है आयरलैंड

आयरिश न्यूज वेबसाइट Extra.ie को दिए इंटरव्यू में साइमन हैरिस ने कहा कि आयरलैंड पूरे EU में ID-वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट्स को लागू करने के लिए जोर देगा। उन्होंने बताया कि आयरलैंड में डिजिटल ‘एज ऑफ कंसेंट’ 16 वर्ष तय है, लेकिन इसका सही ढंग से पालन नहीं हो पा रहा है। हैरिस का मानना है कि यह एक अहम सुरक्षा कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि एनोनिमस अकाउंट्स और बॉट्स की समस्या सिर्फ आयरलैंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक चुनौती बन चुकी है।

हाल ही में डबलिन की एक महिला सैंड्रा बैरी को हैरिस और उनके परिवार को धमकी भरे संदेश भेजने के मामले में छह महीने की सजा सुनाई गई थी, जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया।

अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव

इस बीच टेक्नोलॉजी रेगुलेशन को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। इससे पहले ट्रंप प्रशासन EU से टेक कंपनियों पर नियमों को लेकर संयम बरतने की अपील कर चुका है। हाल ही में वॉशिंगटन ने पांच प्रमुख यूरोपीय हस्तियों पर वीजा प्रतिबंध लगाए, जिनमें पूर्व EU कमिश्नर थिएरी ब्रेटन और यूके स्थित रिसर्चर इमरान अहमद भी शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये लोग अमेरिकी कंपनियों पर सीमा से बाहर तक सेंसरशिप लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि साइमन हैरिस को उम्मीद है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस पहल का समर्थन करेंगे।

लोकतंत्र, सुरक्षा और टेक कंपनियों की भूमिका

हैरिस ने साफ किया कि यह मुद्दा केवल आयरलैंड का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि टेक कंपनियों के पास बिना किसी कानूनी दबाव के भी सख्त कदम उठाने की क्षमता है। आयरलैंड की यह पहल ऑनलाइन दुर्व्यवहार, फेक न्यूज और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं से निपटने की दिशा में एक ठोस प्रयास मानी जा रही है। यदि यह मुहिम सफल होती है, तो पूरे यूरोप में सोशल मीडिया का स्वरूप बदल सकता है और यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित डिजिटल माहौल मिल सकता है।


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