द देवरिया न्यूज़,वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ग्रीनलैंड पर प्रभाव बढ़ाने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत ग्रीनलैंड में एक अत्याधुनिक और बुलेटप्रूफ मेगा दूतावास बनाने की तैयारी की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दूतावास में बड़ी संख्या में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से जुड़े अधिकारी और स्थानीय लोगों को शामिल किया जाएगा, जो ग्रीनलैंड में अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाने के लिए अभियान चलाएंगे।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से आर्कटिक क्षेत्र में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैंड को लेकर रुचि दिखाते रहे हैं। पहले ट्रंप प्रशासन ने इस द्वीप को खरीदने की संभावना जताई थी और सैन्य कार्रवाई के संकेत भी दिए गए थे। हालांकि, मौजूदा योजना से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका फिलहाल सैन्य विकल्प से दूरी बनाते हुए कूटनीतिक और रणनीतिक तरीकों से अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
ब्रिटिश अखबार द सन की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनलैंड में प्रस्तावित अमेरिकी दूतावास करीब 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला एक लग्जरी टावर होगा। यह इमारत पूरी तरह बख्तरबंद होगी, जिससे गोलियों और विस्फोटों का असर नहीं पड़ेगा। इस परिसर में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। साथ ही, अमेरिकी विदेश विभाग ऐसे कर्मियों की भर्ती कर रहा है, जो स्थानीय भाषा और संस्कृति से परिचित हों, ताकि ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका के करीब लाया जा सके।
फिलहाल ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अमेरिका का एक छोटा नॉर्डिक-स्टाइल दूतावास मछली पकड़ने वाले बंदरगाह के पास स्थित है। जल्द ही दूतावास का स्टाफ राजधानी की मुख्य सड़क पर बनी एक नई आधुनिक इमारत के बेसमेंट में शिफ्ट होने वाला है। दूतावास के प्रवक्ता का कहना है कि यह कदम अमेरिका और ग्रीनलैंड के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
डेनिश सशस्त्र बल खुफिया सेवा के पूर्व मुख्य विश्लेषक जैकब कार्सबो का मानना है कि नई इमारत में शिफ्ट होने के बाद अमेरिका ग्रीनलैंड में जासूसी गतिविधियों को और तेज कर सकता है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य स्थानीय आबादी के बीच अमेरिका के प्रति सकारात्मक माहौल बनाना और धीरे-धीरे ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की अमेरिकी रणनीति को आगे बढ़ाना है।
इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। उनका दावा है कि ग्रीनलैंड के आसपास के आर्कटिक समुद्री क्षेत्र में रूस और चीन की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिससे इस क्षेत्र की सुरक्षा को खतरा है। इसी आधार पर ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
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