ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ लगभग सभी द्विपक्षीय रिश्ते तोड़ दिए थे, जिसका असर खेल और कूटनीति दोनों में साफ दिखा। यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से भी बचते रहे हैं। ऐसे माहौल में जयशंकर और सादिक का हाथ मिलाना पाकिस्तान में कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है।
पाकिस्तान की संसद का बयान
पाकिस्तानी संसद के सेक्रेटिएट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बातचीत के दौरान डॉ. जयशंकर ने स्पीकर अयाज सादिक को अपना परिचय दिया और बताया कि वे उन्हें पहचानते थे। सेक्रेटिएट ने इसे मई 2025 के संघर्ष के बाद भारत की ओर से पहला महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय संपर्क बताया।
पाकिस्तानी नेताओं और पूर्व राजनयिकों की राय
जियो न्यूज से बातचीत में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि यह हैंडशेक पूरी तरह अचानक था और पहले से इसकी कोई योजना नहीं थी। उन्होंने साफ किया कि इसे जमे हुए भारत–पाकिस्तान संबंधों में “आइस ब्रेकर” के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि भारत ने अब तक इस्लामाबाद के साथ बातचीत बहाल करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है।
पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) की सीनेटर और पूर्व राजदूत शेरी रहमान ने भी इस राय से सहमति जताई। हालांकि उन्होंने इस मुलाकात का स्वागत करते हुए कहा कि बुनियादी राजनयिक शिष्टाचार की वापसी हमेशा सकारात्मक संकेत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि असली परीक्षा तब होगी, जब भारत न्यूनतम कूटनीतिक प्रोटोकॉल और समझौतों को बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा। उनका इशारा सिंधु जल समझौते की ओर था, जिसे भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।
‘खयाली पुलाव’ या नई शुरुआत?
पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर मुशाहिद हुसैन सैयद ने इस हैंडशेक को भारत की ओर से सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि जयशंकर के चेहरे पर हल्की मुस्कान यह दिखाती है कि यह मुलाकात पूरी तरह औपचारिक नहीं थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि केवल हाथ मिलाना रिश्तों में सुधार का ठोस संकेत नहीं है, लेकिन 2026 में दोनों देशों के संबंध सामान्य होने की शुरुआत हो सकती है।
वहीं, अमेरिकी विश्लेषक माइकल कुगेलमैन का मानना है कि जयशंकर के लिए ऐसे मौके पर हाथ मिलाने से इनकार करना कूटनीतिक गलती साबित हो सकता था। किसी तीसरे देश में आयोजित राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान तनाव को सार्वजनिक रूप से दिखाना भारत की छवि को नुकसान पहुंचा सकता था।
कुल मिलाकर, एक साधारण हैंडशेक ने पाकिस्तान में उम्मीदों, आशंकाओं और राजनीतिक बहसों का दौर शुरू कर दिया है। अब देखना यह होगा कि यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित रहती है या आने वाले समय में भारत–पाकिस्तान संबंधों में किसी बड़े बदलाव की भूमिका निभाती है।