द देवरिया न्यूज़,टी20 वर्ल्ड कप 2026 : इस बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए परामर्श जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही वहां रह रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों (PIO) से सतर्क रहने को कहा गया है। मंत्रालय ने विशेष रूप से विरोध प्रदर्शन और रैलियों वाले इलाकों से दूर रहने की हिदायत दी है।
उधर, टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बांग्लादेश की ओर से मैचों के रिशेड्यूल की मांग पर अब तक आईसीसी की तरफ से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। कई दिन बीत जाने के बावजूद आईसीसी ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट्स में आईसीसी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि बांग्लादेश की मांग पर आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने मैचों के रिशेड्यूल की प्रक्रिया शुरू कराई है, लेकिन इस संबंध में आईसीसी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, अगले दो दिनों में आईसीसी अधिकारी बीसीसीआई और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के साथ बैठक कर सकते हैं, जिसके बाद स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
टी20 वर्ल्ड कप में सह-मेजबान होने के नाते बीसीसीआई के पास इस मामले में हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है। टूर्नामेंट शुरू होने में केवल 30 दिन का समय बचा है और ऐसे में शेड्यूल में बदलाव न सिर्फ बांग्लादेश, बल्कि अन्य टीमों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। आयोजन से जुड़ी जमीनी जिम्मेदारियां आईसीसी नहीं, बल्कि बीसीसीआई संभाल रहा है। ऐसे में रिशेड्यूलिंग से पैदा होने वाली लॉजिस्टिक, सुरक्षा और राजस्व से जुड़ी चुनौतियों का सीधा असर बीसीसीआई पर पड़ेगा। इसके अलावा पहले से होटल और फ्लाइट बुकिंग करा चुके क्रिकेट प्रशंसकों का मुद्दा भी अहम माना जा रहा है।
इस पूरे मामले में भारत सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी अपनी सरकार के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया है। बांग्लादेश सरकार पहले ही IPL 2026 के टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगा चुकी है। ऐसे में वर्ल्ड कप मैचों की रिशेड्यूलिंग को लेकर बढ़ता विवाद भारत-बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है। माना जा रहा है कि बीसीसीआई इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से सलाह ले सकता है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बांग्लादेश दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेत जरूर मिले थे, लेकिन इस मसले पर सरकार का रुख क्या होगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
अगर आईसीसी के पिछले फैसलों पर नजर डालें तो बांग्लादेश पर कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। 1996 वर्ल्ड कप में श्रीलंका जाने से इनकार करने पर ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के अंक काटे गए थे। वहीं 2003 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड द्वारा मैच न खेलने की स्थिति में विपक्षी टीमों को अंक दिए गए थे। साल 2016 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश दौरे से इनकार करने पर ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था। इन उदाहरणों के आधार पर आईसीसी सख्त रुख अपना सकती है। हालांकि बांग्लादेश ने अपनी मांग के समर्थन में भारतीय टीम के चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में पाकिस्तान न जाने का उदाहरण दिया है, जहां मैचों को यूएई में आयोजित किया गया था। ऐसे में बांग्लादेश के खिलाफ सीधी कार्रवाई करना आईसीसी के लिए आसान नहीं होगा।
बांग्लादेश के मौजूदा शेड्यूल के अनुसार उसे ग्रुप स्टेज में तीन मैच कोलकाता के ईडन गार्डंस और एक मैच मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में खेलना है। कोलकाता में बांग्लादेश को 7 फरवरी को वेस्टइंडीज, 9 फरवरी को इटली और 14 फरवरी को इंग्लैंड के खिलाफ खेलना है, जबकि 17 फरवरी को नेपाल के खिलाफ मैच मुंबई में तय है। यदि शेड्यूल में बदलाव किया गया तो वेस्टइंडीज, इंग्लैंड, इटली और नेपाल जैसी टीमें भी आपत्ति जता सकती हैं, क्योंकि इससे भारत और श्रीलंका के बीच लंबी हवाई यात्रा करनी पड़ सकती है। टी20 वर्ल्ड कप के व्यस्त कार्यक्रम के बीच यह बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
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