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भारत ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री के बयान को किया खारिज, बोला– ट्रेड डील पर बातचीत सही दिशा में, पीएम मोदी–ट्रंप में लगातार संपर्क

Published on: January 10, 2026
India meets US Commerce Minister

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक के उस बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात नहीं की। भारत ने इस दावे को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि बातचीत को इस तरह पेश करना बिल्कुल सही नहीं है।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन बयानों को देखा गया है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2024 को ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए सहमत हो चुके थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताएं हुईं, जिनका उद्देश्य संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता करना था।

कई बार समझौते के करीब पहुंचे

विदेश मंत्रालय ने बताया कि कई मौकों पर दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके थे। हालांकि, मीडिया में इन चर्चाओं को जिस तरह से दिखाया गया है, वह सटीक नहीं है। मंत्रालय ने दोहराया कि भारत इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे दोनों देशों की पूरक अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद मानता है।

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच नियमित संपर्क

विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि शीर्ष स्तर पर राजनीतिक संवाद की कोई कमी नहीं रही है। बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वर्ष 2025 के दौरान आठ बार फोन पर बातचीत हुई, जिसमें भारत–अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के कई अहम पहलुओं पर चर्चा की गई।

क्या कहा था अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने

दरअसल, हॉवर्ड लटनिक ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए आगे नहीं बढ़ पाया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत उस समय समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तैयार नहीं था और इसी कारण अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते कर लिए।

भारत की ओर से आई इस सख्त प्रतिक्रिया के बाद साफ हो गया है कि नई दिल्ली अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर गंभीर है और गलत धारणाओं को दूर करना चाहती है।


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