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योगी सरकार की जल नीति से बदले हालात, भूजल संरक्षण में उत्तर प्रदेश बना मॉडल राज्य

Published on: January 27, 2026
From the water policy of Yogi government
द देवरिया न्यूज़,लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में जल संकट से निपटने के लिए एक दूरदर्शी और दीर्घकालिक रणनीति अपनाई है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर साफ दिखाई देने लगे हैं। प्रदेश सरकार ने भूजल संरक्षण को केवल पर्यावरण तक सीमित न रखते हुए खेती, ग्रामीण जीवन और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जोड़ा है। ‘अटल भूजल योजना’, ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जन भागीदारी’ जैसे अभियानों ने उत्तर प्रदेश में जल प्रबंधन को नई दिशा दी है।

केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित ‘अटल भूजल योजना’ के तहत उत्तर प्रदेश उन सात राज्यों में शामिल है, जहां जल संकटग्रस्त क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश में 26,945.97 हेक्टेयर क्षेत्र में जल के कुशल उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। भूजल स्तर की सटीक निगरानी के लिए 550 डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर और 392 डिजिटल व एनालॉग जल स्तर संकेतक लगाए गए हैं। इन आधुनिक उपकरणों से भूजल दोहन और पुनर्भरण की लगातार निगरानी संभव हो सकी है, जिससे नीति निर्धारण अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी हुआ है।

सरकार ने जल प्रबंधन में तकनीक को अहम आधार बनाया है। डिजिटल निगरानी प्रणाली के चलते अब पानी के स्तर में गिरावट की जानकारी समय रहते मिल जाती है, जबकि पहले कई इलाकों में यह सूचना देर से सामने आती थी। इससे समय पर सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिल रही है।

बारिश के पानी के संरक्षण के लिए भी प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्य हुए हैं। ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियानों के तहत हजारों जल संचयन संरचनाएं विकसित की गई हैं। देशभर में 39.60 लाख कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल संचयन कार्य पूरे किए गए हैं, जिनका लाभ उत्तर प्रदेश के कई जिलों को मिला है। तालाबों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से भूजल स्तर को मजबूती मिली है।

इन प्रयासों का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण आबादी को मिला है। सिंचाई सुविधाएं बेहतर होने से खेती को स्थिरता मिली है, वहीं कई इलाकों में पेयजल संकट से भी राहत मिली है। सरकार का दावा है कि जल सुरक्षा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

‘डबल इंजन सरकार’ के मॉडल के तहत केंद्र और राज्य के समन्वय से उत्तर प्रदेश को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर काम हो रहा है। भूजल संरक्षण, पुनर्भरण और निगरानी को विकास से जोड़कर भविष्य में जल संकट को रोकने का लक्ष्य रखा गया है। योगी सरकार की यह जल नीति प्रदेश के सुरक्षित और सतत भविष्य की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है।


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