अमिताभ ठाकुर को 19 जनवरी को देवरिया के जिला जज न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, लेकिन जमानतदारों के रिकॉर्ड और निर्धारित बांड न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण रिहाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। न्यायालय सूत्रों के अनुसार, जब तक सभी आवश्यक दस्तावेज और बांड विधिवत जमा नहीं होते, तब तक जेल से रिहाई संभव नहीं है। इसी वजह से जमानत आदेश के बाद भी अमिताभ ठाकुर को जिला कारागार में ही रहना पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जमानत मिलने के बाद लखनऊ के एक पुराने मामले में जारी वारंट-बी जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में देवरिया से रिहाई के बाद लखनऊ पुलिस द्वारा उन्हें अपने साथ ले जाने की संभावना है। इसी कारण जमानतदारों से संबंधित प्रपत्र फिलहाल न्यायालय में जमा नहीं किए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि लखनऊ के मामले में जमानत मिलने के बाद ही देवरिया न्यायालय में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे, जिसके बाद अंतिम रूप से रिहाई आदेश पर अमल हो सकेगा।
गौरतलब है कि अमिताभ ठाकुर 10 दिसंबर से देवरिया जिला कारागार में बंद हैं। उनके खिलाफ सदर कोतवाली में कूटरचना और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
जमानत की खबर के बाद उनके परिजनों और समर्थकों में रिहाई की उम्मीद जगी थी, लेकिन जमानतदारों की प्रक्रिया पूरी न होने से यह उम्मीद फिलहाल अधूरी रह गई है। शासकीय अधिवक्ता राजेश मिश्र ने बताया कि जमानतदारों के प्रपत्र और बांड जमा होने के बाद ही अमिताभ ठाकुर की रिहाई संभव हो सकेगी।