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भविष्य के युद्ध में ड्रोन की बड़ी भूमिका: 2030 तक भारत बने ग्लोबल हब- राजनाथ सिंह

Published on: March 20, 2026
Drones will have a big role in the future war.
द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक भविष्य के युद्धों का अहम हिस्सा बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजरायल जैसे संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ उन्नत तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
नई दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भारत में मजबूत और आत्मनिर्भर ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल तैयार उत्पाद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ड्रोन के सभी प्रमुख कंपोनेंट—जैसे मॉड्यूल, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी—भी देश में ही निर्मित होने चाहिए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में दुनिया के कई देश ड्रोन निर्माण के लिए जरूरी अहम पुर्जों के लिए चीन पर निर्भर हैं, लेकिन भारत को इस निर्भरता से बाहर निकलकर पूरी तरह स्वदेशी उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि यह चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं।
रक्षा मंत्री ने एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को इस मिशन में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस क्षेत्र में हर संभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि यदि सभी मिलकर मिशन मोड में काम करें, तो भारत 2030 तक स्वदेशी ड्रोन निर्माण का एक वैश्विक केंद्र बन सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों की अहम भूमिका होती है। कई बार बड़े बदलाव छोटे प्रयासों से ही शुरू होते हैं, इसलिए हर स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्तमान में भारत की जीडीपी में उद्योग क्षेत्र का योगदान करीब 15-16 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। विशेष रूप से निर्माण क्षेत्र के विस्तार के जरिए अर्थव्यवस्था को और मजबूती दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में एमएसएमई सेक्टर को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उद्यम पोर्टल और उद्यम असिस्ट पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए छोटे उद्योगों के पंजीकरण और पहचान की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
रक्षा मंत्री ने इसे राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगा।

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