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ऑपरेशन सिंदूर में डीआरडीओ की तकनीक निर्णायक, रक्षा मंत्री ने 68वें स्थापना दिवस पर की जमकर सराहना

Published on: January 2, 2026
DRDO in Operation Sindoor
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : रक्षा मंत्री ने देश की रक्षा तैयारियों को मजबूती देने में डीआरडीओ की भूमिका की जमकर सराहना की है। डीआरडीओ के 68वें स्थापना दिवस पर नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डीआरडीओ द्वारा विकसित स्वदेशी हथियार प्रणालियों ने निर्णायक भूमिका निभाई। ये प्रणालियां बिना किसी बाधा के प्रभावी ढंग से काम करती रहीं, जिससे सैन्य अभियानों की सफलता सुनिश्चित हुई और जवानों का मनोबल भी ऊंचा रहा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेशी तकनीकों से लैस भारतीय सशस्त्र बल आज पहले से कहीं अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर हो चुके हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि डीआरडीओ भविष्य में ‘सुदर्शन चक्र’ जैसी महत्वाकांक्षी पहल में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2025 के संबोधन में घोषित की थी, जिसके तहत अगले दस वर्षों में देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और ठिकानों को मजबूत वायु रक्षा प्रणाली से सुरक्षित किया जाना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा का महत्व ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आया।
उन्होंने डीआरडीओ को केवल तकनीक विकसित करने वाला संगठन नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक बताया। रक्षा मंत्री के अनुसार, निजी क्षेत्र, उद्योग, स्टार्ट-अप और शिक्षण संस्थानों के साथ बढ़ते सहयोग से एक सशक्त और समन्वित रक्षा इकोसिस्टम तैयार हुआ है। अनुसंधान से लेकर परियोजना प्रबंधन तक डीआरडीओ की कार्यप्रणाली अब पहले से अधिक तेज, सरल और विश्वसनीय बनी है।
नवाचार और डीप टेक्नोलॉजी पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखना और भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार रहना आज की सबसे बड़ी जरूरत है, क्योंकि तकनीक तेजी से बदल रही है और कल का ज्ञान आज अप्रासंगिक हो सकता है।
कार्यक्रम के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को वर्ष 2025 की प्रमुख उपलब्धियों, 2026 के रोडमैप और संगठनात्मक सुधारों की जानकारी दी। इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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