छात्रों ने मांग पत्र में महाविद्यालयों में जाति-आधारित प्रावधानों को अनुपयोगी बताते हुए सर्व-वर्गीय समान अधिकार नीति लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि उच्च शिक्षा, विशेषकर तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में जाति-आधारित कोटा व्यवस्था योग्यता के सिद्धांत को कमजोर करती है और प्रतिभा की पहचान में बाधा बनती है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 14 से 16 के तहत प्रदत्त समानता की गारंटी को एससी-एसटी-ओबीसी केंद्रित विधानों के जरिए सीमित करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है। उनका आरोप है कि ऐसी नीतियां छात्रों को जातीय समूहों में विभाजित करती हैं, जिससे सामाजिक एकता प्रभावित होती है।
छात्र नेता कुबेरनाथ सिंह ने कहा कि वे किसी वर्ग के विरोध में नहीं हैं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं जहां चयन का आधार केवल योग्यता हो।
वहीं आशुतोष ओझा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समान अवसर देना है, न कि छात्रों को जाति के आधार पर बांटना; सर्व-वर्गीय समान अधिकार नीति ही समावेशी और न्यायपूर्ण व्यवस्था का रास्ता है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में
जाति-आधारित प्रावधानों का तत्काल स्थगन और पुनर्मूल्यांकन,
सर्व-वर्गीय समान अधिकार नीति का कार्यान्वयन,
और शुद्ध योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया शामिल हैं।
धरना प्रदर्शन में अमिताभ पांडे, पंडित शशांक शेखर, हिमांशु सिंह, आशीष कुमार त्रिपाठी, अभय कुमार राठौर, आकाश मणि त्रिपाठी, सत्यम तिवारी, शंभू नाथ सिंह, दुर्गेश शर्मा, निर्भय कुमार शाही, साजिद हुसैन और आशीष त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।