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कांग्रेस की हार, राहुल की ‘इनसिक्योरिटी’ और प्रियंका की भूमिका पर शकील अहमद का बड़ा खुलासा

Published on: January 26, 2026
Congress's defeat, Rahul's

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व नेता डॉ. शकील अहमद ने पार्टी की लगातार चुनावी हार, राहुल गांधी की नेतृत्व शैली और प्रियंका गांधी की संभावित भूमिका को लेकर रविवार को खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के लिए सीधे तौर पर नेतृत्व की कार्यशैली, आंतरिक असुरक्षा और परिवार-केंद्रित फैसलों को जिम्मेदार ठहराया। शकील अहमद ने साफ कहा कि वे राहुल गांधी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पार्टी के हित में सच्चाई कहना जरूरी है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी की असुरक्षा के कारण ही प्रियंका गांधी को आगे आने का पूरा मौका नहीं मिल पा रहा है।

“राहुल को समझाने की कीमत चुकानी पड़ी”

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और सीताराम केशरी जैसे अलग-अलग गुटों वाली कांग्रेस को एकजुट कर एक मजबूत संगठन खड़ा किया और पार्टी को संकट से बाहर निकाला। लेकिन राहुल गांधी सोनिया गांधी की बनाई हुई उस कांग्रेस को भी संभाल नहीं पाए।

शकील अहमद ने कहा,
“हम राहुल गांधी के विरोधी नहीं हैं। मैंने उनके साथ काफी समय बिताया है। जहां गलती दिखती थी, कमरे में ही टोक देता था। मुझे लगता था कि कांग्रेस की भलाई ही देश की भलाई है, लेकिन शायद राहुल को यह बात चुभ गई और मुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ी।”

राहुल गांधी को बताया ‘एरोगेंट’

शकील अहमद ने राहुल गांधी को साफ तौर पर ‘एरोगेंट’ (अहंकारी) बताया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि शशि थरूर के चुनाव मैदान में उतरने पर वे उन्हें वोट देना चाहते थे, लेकिन सोनिया और राहुल द्वारा मल्लिकार्जुन खड़गे को आधिकारिक उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने “वोट बर्बाद न हो” इसलिए खड़गे को वोट दिया।

उनका कहना था कि खड़गे आज भी यह कहते हैं कि उन्हें सोनिया और राहुल ने अध्यक्ष बनाया। शकील अहमद ने कहा,
“जब सोनिया, राहुल और प्रियंका एक साथ होते हैं, तो नेहरू-गांधी परिवार जो तय करेगा, वही पार्टी अध्यक्ष होगा। बाकी नेताओं में हमेशा संशय रहता है।”

प्रियंका गांधी की क्षमता पर भरोसा

प्रियंका गांधी को लेकर शकील अहमद ने कहा कि उनका उनसे ज्यादा व्यक्तिगत संपर्क नहीं रहा, लेकिन उनकी स्पीच जनता से सबसे ज्यादा जुड़ती है।
“उनके भाषण में भारतीयता का भाव है। सोनिया गांधी ने संस्कृति को निभाया, लेकिन प्रियंका भारत में पैदा हुई हैं, इसलिए उनकी भाषा और अंदाज ज्यादा सटीक और प्रभावशाली है।”

“प्रियंका को आगे क्यों नहीं लाया गया?”

शकील अहमद का मानना है कि कांग्रेस में नेहरू-गांधी परिवार पर भरोसा है और नेतृत्व का फैसला भी परिवार ही करता है। हालांकि, पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि राहुल गांधी की असुरक्षा के कारण प्रियंका गांधी को फ्रंटलाइन में नहीं लाया गया।

उन्होंने कहा कि 30-32 साल राजनीति करने के बाद प्रियंका सांसद बनीं, महासचिव रहीं, लेकिन उन्हें कभी किसी बड़े राज्य की जिम्मेदारी नहीं मिली। यूपी में हार के बाद उन्हें असम जैसे छोटे राज्य का प्रभारी बनाया गया, ताकि वे मुख्य मोर्चे पर न दिखें। पार्टी हारती रही, लेकिन चेहरा हमेशा राहुल गांधी ही बने रहे।

“राहुल ही पार्टी के मालिक”

शकील अहमद ने कहा,
“राहुल ही पार्टी के मालिक हैं। प्रियंका फ्रंट में आना चाहती हैं या भाई के पीछे रहकर काम करना चाहती हैं, यह अंदर की बात है। दोनों में गहरा प्रेम है। लेकिन बाहर से देखने पर प्रियंका का जन-संपर्क और भाषण क्षमता किसी से कम नहीं है।”

शकील अहमद के इन बयानों के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, परिवार की भूमिका और भविष्य की रणनीति को लेकर बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।


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