द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट खोलने में अमेरिका की मदद नहीं की, तो इस सैन्य गठबंधन का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है। ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में यूरोपीय देशों का साथ न मिलना अमेरिका को स्वीकार नहीं है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को करीब 17 दिन हो चुके हैं, लेकिन स्थिति अभी भी नियंत्रण में नहीं आ सकी है। ट्रंप का कहना है कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर होने के बावजूद लड़ाई जारी रखे हुए है। उनके मुताबिक ईरान के पास मजबूत नौसेना, वायुसेना या एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम नहीं है, लेकिन उसने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं, जिसकी वजह से यह जलमार्ग खतरे में है।
तेल की कीमतों पर असर
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है। 2022 के बाद पहली बार पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। विश्लेषकों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द नहीं खुला, तो कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका में भी महंगाई बढ़ने का खतरा है।
ईरान का जवाब
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन ईरान के दुश्मन देशों, खासकर अमेरिका और इजरायल के जहाजों के लिए यह रास्ता बंद है। उनका कहना है कि जो देश अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं कर रहे हैं, उनके जहाज इस रास्ते से गुजर सकते हैं, हालांकि उन्हें ईरानी नौसेना के साथ समन्वय करना होगा। उन्होंने अमेरिका के साथ किसी भी तरह के सीजफायर की मांग से भी इनकार किया है।
जयशंकर का कूटनीतिक संदेश
इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संकेत दिया है कि सैन्य दबाव की बजाय कूटनीति से समाधान निकालना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा कि भारत के नजरिए से बेहतर यही होगा कि सभी पक्ष आपसी तालमेल से समाधान तलाशें। उनका कहना था कि यदि ज्यादा देशों को बातचीत की प्रक्रिया में शामिल किया जाए, तो दुनिया के लिए बेहतर नतीजे निकल सकते हैं।
जयशंकर का यह बयान उस समय आया है जब ट्रंप ने नाटो देशों के साथ-साथ चीन, फ्रांस और ब्रिटेन से खाड़ी क्षेत्र में युद्धपोत भेजने की अपील की है, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित रूप से खोला जा सके।
यूरोपीय देशों की पहल
हालांकि कई यूरोपीय देश सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत के रास्ते तलाश रहे हैं। फ्रांस और इटली ने ईरान के साथ संवाद शुरू कर दिया है, ताकि तेल टैंकरों की आवाजाही दोबारा बहाल की जा सके। यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की ब्रसेल्स में होने वाली बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास
इसी बीच भारत के पास दिसंबर 2025 से ब्रिक्स की अध्यक्षता भी है। 2009 में बने इस आर्थिक संगठन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका संस्थापक सदस्य हैं। 2024 में इसके विस्तार के बाद इंडोनेशिया, इथियोपिया, मिस्र, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी इसमें शामिल हो चुके हैं।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति गुजरती है। भारत के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के लगभग 85 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस के टैंकर सऊदी अरब, इराक और यूएई से इसी रास्ते होकर आते हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
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