द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका (PIL) दायर करने वाले व्यक्ति को कड़ी फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान अदालत को शक हुआ कि याचिकाकर्ता ने खुद याचिका तैयार नहीं की है। इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने उससे कई सवाल पूछे और चेतावनी दी कि अगर वह सच नहीं बताएगा तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सबसे पहले याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उसने खुद ही याचिका ड्राफ्ट की है। इस पर उसने दावा किया कि याचिका उसी ने तैयार की है और अपने मोबाइल फोन को भी जांच के लिए अदालत में जमा कराने की पेशकश की।
इसके बाद अदालत ने उसकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में पूछा। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने केवल 12वीं तक पढ़ाई की है और लुधियाना के सनातन धर्म स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है। इस पर चीफ जस्टिस ने हल्के अंदाज में कहा कि अदालत उसके दावे की पुष्टि के लिए अंग्रेजी का एक छोटा टेस्ट भी ले सकती है। उन्होंने कहा कि अगर वह 30 अंक भी ले आता है तो अदालत उसके दावे पर विचार करेगी।
पीठ ने याचिका में इस्तेमाल किए गए जटिल कानूनी शब्दों को लेकर भी सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने याचिका की एक पंक्ति पढ़ते हुए पूछा कि “कॉरपोरेट डोनर्स के लिए फिड्यूशरी रिस्क” का क्या मतलब होता है। याचिकाकर्ता इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।
इसके बाद अदालत ने उससे दोबारा पूछा कि क्या किसी वकील या अन्य व्यक्ति ने याचिका तैयार करने में उसकी मदद की है। काफी पूछताछ के बाद याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि उसने जानकारी जुटाने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल किया था और सुप्रीम कोर्ट के एक टाइपिस्ट ने याचिका टाइप करने में उसकी मदद की थी।
याचिकाकर्ता ने बताया कि टाइपिस्ट ने इसके लिए उससे 1,000 रुपये प्रति घंटे का शुल्क लिया था। उसने यह भी कहा कि उसने टाइपिस्ट को चार जैकेट उपहार में दिए थे। इस पर अदालत ने उस टाइपिस्ट को भी कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने किसी और के द्वारा तैयार की गई अस्पष्ट और कमजोर याचिका को अपने नाम से दाखिल किया है।
हालांकि अदालत ने इस मामले में विस्तृत जांच का आदेश नहीं दिया, लेकिन याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को कड़ी चेतावनी दी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भविष्य में इस तरह की ‘फालतू’ याचिकाएं दाखिल करने से बचें।
हल्के अंदाज में उन्होंने याचिकाकर्ता को सलाह देते हुए कहा कि जनहित याचिका दाखिल करने के बजाय अपने काम-धंधे पर ध्यान दें। उन्होंने कहा, “वापस जाइए और कुछ और स्वेटर बेचिए। अगर ऐसी याचिकाएं दाखिल करते रहेंगे तो आपको कोर्ट का खर्च भी उठाना पड़ सकता है।”
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