द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों तथा ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद मुस्लिम देशों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस घटनाक्रम का असर पाकिस्तान में भी साफ दिखाई दे रहा है, जहां सरकार को घरेलू स्तर पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के अमेरिका के साथ करीबी संबंधों को लेकर विपक्ष और आम लोगों के बीच नाराजगी बढ़ गई है। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करने के फैसले को लेकर विवाद गहरा गया है।
पाकिस्तान में विपक्षी दलों, सिविल सोसायटी और धार्मिक संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार की कड़ी आलोचना की है। कई जगहों पर लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस अमेरिकी नेतृत्व पर ईरान पर हमलों का आरोप लग रहा है, उसे शांति का नोबेल पुरस्कार देने की सिफारिश करना गलत कदम है।
विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से इस फैसले के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उनका तर्क है कि ऐसे समय में जब ईरान में हमलों के कारण भारी नुकसान हुआ है, तब ट्रंप को शांति का पुरस्कार देने की सिफारिश करना पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है।
आलोचकों का यह भी कहना है कि ईरान में हुए हमलों के दौरान कई नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। इसी मुद्दे को लेकर पाकिस्तान में अमेरिका के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है और इसका सीधा असर सरकार की छवि पर भी पड़ रहा है।
हालांकि, पाकिस्तान सरकार इस पूरे मामले पर फिलहाल ज्यादा खुलकर बयान देने से बचती नजर आ रही है। लेकिन विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
पाकिस्तान और अमेरिका के बीच रिश्ते पिछले कुछ समय से बेहतर होते दिखाई दे रहे थे। पिछले साल पाकिस्तान और भारत के बीच सीमित सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तानी नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना की थी और युद्धविराम का श्रेय भी उन्हें दिया था। इसी दौरान पाकिस्तान ने ट्रंप के नाम को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया था।
बताया जाता है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने पिछले वर्ष वॉशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात भी की थी। इसके बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ कुछ अंतरराष्ट्रीय शांति पहल में भी शामिल होने का निर्णय लिया था।
लेकिन ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में अमेरिका के खिलाफ गुस्सा बढ़ने लगा है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं और ट्रंप को नोबेल के लिए नामित करने के फैसले की आलोचना कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विरोध जारी रहा तो पाकिस्तान की घरेलू राजनीति और विदेश नीति दोनों पर इसका असर पड़ सकता है।
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