द देवरिया न्यूज़,तेल अवीव/तेहरान। इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार और तीखा होता जा रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई ईरान की ताकत को कमजोर कर रही है और उसकी नेतृत्व व्यवस्था पर भी असर डाल रही है।
नेतन्याहू ने सोमवार रात नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर के दौरे के दौरान कहा कि इजरायल की कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ईरानी लोगों को दमन से मुक्ति दिलाना है, लेकिन आखिरकार फैसला उन्हें ही करना होगा। उन्होंने दोहराया कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई अभी जारी रहेगी।
दूसरी ओर ईरान ने भी कड़े रुख का संकेत दिया है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने अमेरिका और इजरायल के साथ संभावित युद्धविराम की संभावना से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई युद्धविराम की बात करता है तो पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में दोबारा हमला नहीं किया जाएगा और हमलों की जिम्मेदारी भी स्वीकार की जाएगी।
गरीबाबादी ने दावा किया कि मौजूदा संघर्ष में ईरान का पलड़ा भारी है और उनके विरोधियों की कई योजनाएं सफल नहीं हो पाई हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला ईरान ही करेगा।
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। युद्ध अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसका असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है।
इस बीच ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद इजरायल के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार सोमवार को ईरान ने इजरायल पर सात मिसाइल हमले किए। वहीं लेबनान के हिज्बुल्लाह संगठन ने भी इजरायली सेना को निशाना बनाते हुए रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन से कई हमले किए।
इजरायली मीडिया के मुताबिक इन हमलों के कारण लाखों लोगों को बम शेल्टर में शरण लेनी पड़ी। अनुमान है कि रविवार शाम से सोमवार दोपहर तक करीब 50 लाख लोग सुरक्षा के लिए शेल्टर में गए।
वहीं तेल अवीव स्थित इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ (INSS) के आंकड़ों के अनुसार युद्ध के शुरुआती चरण में अमेरिका ने ईरान में लगभग 2,000 ठिकानों को निशाना बनाया था, जबकि इजरायल ने करीब 600 हमले किए थे।
लेकिन युद्ध के अगले चरण में रणनीति बदली और इजरायल ने हमलों की गति बढ़ा दी। दूसरे चरण में अमेरिका ने करीब 1,000 ठिकानों पर हमला किया, जबकि इजरायल ने लगभग 2,800 टारगेट पर कार्रवाई की। कुल मिलाकर अब तक अमेरिका ने ईरान में करीब 3,000 ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि इजरायल ने ईरान में लगभग 3,400 और लेबनान में करीब 600 लक्ष्यों पर हमले किए हैं। इन घटनाओं से साफ है कि मध्य पूर्व में तनाव अभी और बढ़ सकता है।
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