द देवरिया न्यूज़,तेहरान/नई दिल्ली : हिंद महासागर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने एक भीषण हमले में ईरान के युद्धपोत IRIS डेना को निशाना बनाकर उसे तबाह कर दिया। श्रीलंका की सरकार ने इस हमले के बाद 87 लोगों के शव बरामद होने की पुष्टि की है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने Mk-48 टॉरपीडो से इस युद्धपोत पर हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब जहाज श्रीलंका के गाले तट से करीब 40 नॉटिकल मील दूर हिंद महासागर में मौजूद था। यह क्षेत्र श्रीलंका की सीमा से बाहर है, लेकिन उसके आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, युद्धपोत पर करीब 180 लोग सवार थे। श्रीलंकाई नौसेना ने अब तक 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
खास बात यह है कि IRIS डेना उन 19 विदेशी युद्धपोतों में शामिल था, जिन्होंने 17-18 फरवरी को विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में हिस्सा लिया था। यह जहाज उसी सैन्य अभ्यास से लौट रहा था जब उस पर हमला हुआ।
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि भारत ने ईरानी जहाज को अभ्यास में आमंत्रित नहीं किया होता, तो वह उस स्थान पर मौजूद नहीं होता जहां उस पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि अभ्यास के नियमों के अनुसार जहाज पर कोई गोला-बारूद नहीं था, इसलिए वह बिना सुरक्षा के था।
सिब्बल ने यह भी कहा कि अमेरिका को इस बात की जानकारी थी कि जहाज भारत की नौसैनिक एक्सरसाइज में शामिल होकर लौट रहा है। ऐसे में यह हमला कई नैतिक और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े सवाल खड़े करता है।
क्या है इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026
इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 का आयोजन भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में किया था। इस अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक आयोजन में 19 विदेशी युद्धपोतों सहित कुल 85 जहाजों ने हिस्सा लिया था। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने INS सुमेधा से फ्लीट का निरीक्षण किया था।
IRIS डेना के बारे में
यह ईरान की मौज (Moudge) क्लास का स्वदेशी युद्धपोत था।
जहाज एंटी-शिप मिसाइल, टॉरपीडो और आधुनिक रडार सिस्टम से लैस हो सकता है।
इसे ईरान की नौसेना के सबसे आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाता था।
2023 में इसने एक 360-डिग्री वैश्विक मिशन भी पूरा किया था।
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सैन्य कार्रवाई को लेकर भी बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए सुरक्षित माना जाता है, हालांकि आत्मरक्षा की स्थिति में सैन्य कार्रवाई की अनुमति हो सकती है।
फिलहाल इस हमले को लेकर वैश्विक स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं और क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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