द देवरिया न्यूज़,पेरिस : फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने राफेल फाइटर जेट के उत्पादन को लेकर बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने पुष्टि की है कि फ्रांस के बाहर भी राफेल की प्रोडक्शन लाइन स्थापित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। साथ ही डसॉल्ट ने वर्ष 2029 तक राफेल लड़ाकू विमानों के उत्पादन को बढ़ाकर हर महीने चार विमान तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
डसॉल्ट एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एरिक ट्रैपियर ने 4 मार्च को आयोजित कंपनी की वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कंपनी धीरे-धीरे राफेल जेट के उत्पादन की गति बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि 2029 तक हर महीने चार राफेल विमान तैयार करने की योजना है, हालांकि भविष्य में इसे बढ़ाकर पांच विमान प्रति माह तक ले जाने पर भी विचार किया जा रहा है।
ट्रैपियर के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राफेल की अंतरराष्ट्रीय मांग तेजी से बढ़ी है। विभिन्न देशों को निर्यात के बढ़ते ऑर्डर को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है। इसी वजह से कंपनी अब फ्रांस के बाहर भी उत्पादन से जुड़े ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
भारत इस योजना में एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है। डसॉल्ट एविएशन भारत में राफेल लड़ाकू विमानों के बड़े हिस्सों की सब-असेंबली तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। दरअसल, भारत के साथ एक और बड़े रक्षा सौदे की संभावना को देखते हुए कंपनी स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
डसॉल्ट ने वर्ष 2025 में कुल 26 राफेल फाइटर जेट की डिलीवरी की थी। वहीं 2026 में कंपनी का लक्ष्य 28 विमानों की डिलीवरी करने का है। ट्रैपियर ने बताया कि लॉन्ग-लीड आइटम्स की आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए कंपनी 2029 तक प्रति माह चार विमानों के उत्पादन की तैयारी कर रही है। इसके लिए डसॉल्ट के पास लगभग तीन साल का समय है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में और बड़े ऑर्डर मिलते हैं तो कंपनी उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने का फैसला कर सकती है। खासतौर पर भारत से मिलने वाले संभावित ऑर्डर इस फैसले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भारत सरकार 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार कर रही है और इसके लिए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल पहले ही मंजूरी दे चुकी है। यदि यह सौदा तय हो जाता है तो हैदराबाद में राफेल जेट के लिए दूसरी फाइनल असेंबली लाइन स्थापित की जा सकती है।
डसॉल्ट ने पिछले साल टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ साझेदारी की थी, जिसके तहत भारत में हर महीने दो राफेल फ्यूजलेज सेक्शन के स्थानीय उत्पादन की योजना बनाई गई है। इनकी पहली डिलीवरी वर्ष 2028 में होने की संभावना है।
भारत की ओर से इस परियोजना में स्थानीय निर्माण पर खास जोर दिया जा रहा है। भारत सरकार चाहती है कि देश में बनने वाले राफेल विमानों में 50 प्रतिशत से अधिक कंपोनेंट्स स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाएं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रैपियर ने कहा कि कंपनी इस लक्ष्य को समझती है और भारतीय अधिकारियों के साथ इस दिशा में लगातार बातचीत चल रही है।
राफेल के बढ़ते ऑर्डर को देखते हुए डसॉल्ट एविएशन अपने कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ा रही है। कंपनी के अनुसार उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर नई भर्तियां की जा रही हैं। ट्रैपियर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने लगभग 40 प्रतिशत कार्यबल को नया किया है और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
साल 2025 में ही डसॉल्ट ने 1,579 नए कर्मचारियों की भर्ती की, जिसके बाद कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 15,024 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल की बढ़ती वैश्विक मांग और भारत जैसे बड़े रक्षा बाजार के साथ साझेदारी से डसॉल्ट एविएशन आने वाले वर्षों में अपनी उत्पादन क्षमता और मजबूत कर सकती है।
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