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ईरान पर हमले के बाद सऊदी अरब ने खाड़ी देशों से संयम की अपील की, क्षेत्रीय तनाव पर चिंता

Published on: March 3, 2026
Saudi after attack on Iran

द  देवरिया न्यूज़,तेहरान/रियाद : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की खबरों के बाद खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित तौर पर अपने सहयोगी देशों से अपील की है कि वे ऐसे कदमों से बचें, जिनसे तेहरान या उससे जुड़े समूहों की ओर से जवाबी कार्रवाई हो और क्षेत्र व्यापक संघर्ष की ओर बढ़े।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान पर हमले के मुद्दे पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका पर दबाव डाला था। हालांकि इस दावे पर सऊदी अरब की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

खाड़ी देशों से संपर्क

मिडिल ईस्ट आई ने खाड़ी क्षेत्र के सूत्रों के हवाले से बताया कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेताओं से संपर्क कर तनाव कम रखने का संदेश दिया। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी विदेश मंत्रालय द्वारा ईरान के जवाबी हमलों की निंदा किए जाने के बाद ये बातचीत हुई।

सूत्रों के मुताबिक, बातचीत संक्षिप्त थी, लेकिन इस बात पर सहमति जताई गई कि किसी भी सीधे सैन्य कदम से बचा जाए जिससे क्षेत्रीय हालात और बिगड़ सकते हैं।

विदेश मंत्रियों की पहल

रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने भी अपने समकक्षों से बातचीत कर संयम बरतने पर जोर दिया। इन संपर्कों का उद्देश्य गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों के बीच समन्वय बनाए रखना और क्षेत्रीय तनाव को सीमित करना बताया गया।

सूत्रों ने यह भी दावा किया कि क्राउन प्रिंस ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद से भी फोन पर बात की, जबकि हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव की खबरें थीं।

क्षेत्रीय असर को लेकर चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी नेतृत्व इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि खाड़ी का कोई देश सीधे तौर पर सैन्य रूप से शामिल होता है तो यमन के हूती विद्रोही जैसे समूह भी संघर्ष में सक्रिय हो सकते हैं। एक सूत्र ने आशंका जताई कि बढ़ते तनाव का इस्तेमाल तेहरान अपने क्षेत्रीय सहयोगी नेटवर्क को सक्रिय करने के लिए कर सकता है।

ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने भी हमलों पर नाराजगी जताई थी और क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया था।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

इन तमाम रिपोर्टों और सूत्रों के दावों पर संबंधित देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सीमित हैं। पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच कूटनीतिक प्रयासों और संभावित प्रतिक्रियाओं पर वैश्विक नजर बनी हुई है।


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