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बांग्लादेश चुनाव: जमात–बीएनपी में सीधी टक्कर, अवामी लीग पर प्रतिबंध के बीच बदला सियासी समीकरण

Published on: February 13, 2026
Bangladesh elections Jamaat-BNP
द देवरिया न्यूज़,ढाका। बांग्लादेश में गुरुवार को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है और अगले एक सप्ताह के भीतर नई सरकार के गठन की उम्मीद है। इस बार का चुनाव असाधारण परिस्थितियों में हो रहा है, क्योंकि शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद मुकाबला मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के बीच सिमट गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नतीजों से पहले ही जमात-ए-इस्लामी ने सत्ता-संरचना में अपनी पकड़ मजबूत कर एक बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के पिछले 18 महीने जमात के लिए निर्णायक साबित हुए हैं। यूनुस सरकार ने पद संभालने के बाद जमात-ए-इस्लामी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया, जिससे पार्टी को राजनीतिक गतिविधियां तेज करने और संगठनात्मक विस्तार का अवसर मिला।

लेखक और विश्लेषक दीप हलदर का कहना है कि जमात ने अंतरिम शासन के दौरान विभिन्न सरकारी संस्थाओं और प्रशासनिक ढांचे में प्रभाव स्थापित किया है। उनके मुताबिक, “जमात ने जमीनी स्तर से लेकर संस्थागत स्तर तक अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। भले ही बीएनपी सरकार बना ले, लेकिन संस्थागत पकड़ के कारण जमात प्रभावशाली शक्ति बनी रह सकती है।”

एक सर्वे के हवाले से दावा किया गया है कि अवामी लीग के कुछ मतदाता बीएनपी और जमात की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। हालांकि चुनावी रुझान और अंतिम परिणाम मतदान के बाद ही स्पष्ट होंगे।

जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा को लेकर बहस भी तेज है। पार्टी खुद को राजनीतिक संगठन के रूप में प्रस्तुत करती है, जबकि उसके आलोचक इसे व्यापक इस्लामी आंदोलन का हिस्सा मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी राजनीति और वैचारिक एजेंडा—दोनों स्तरों पर जमात की भूमिका आने वाले समय में बांग्लादेश की नीतियों और क्षेत्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

कुछ भारतीय रणनीतिक थिंक टैंकों ने भी इस पर चिंता जताई है कि यदि कट्टरपंथी तत्वों का प्रभाव बढ़ता है, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि इन आशंकाओं पर अंतिम निष्कर्ष चुनाव परिणाम और नई सरकार की नीतियों के बाद ही निकाला जा सकेगा। फिलहाल, पूरे देश और क्षेत्र की निगाहें बांग्लादेश के चुनावी नतीजों पर टिकी हैं, जो आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

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