द देवरिया न्यूज़,लंदन। भारत अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए जल्द ही फ्रांस को एक ऐतिहासिक रक्षा सौदा दे सकता है। मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) प्रोग्राम, जिसे अब मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) नाम दिया गया है, के तहत भारत 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगर यह सौदा अंतिम रूप लेता है तो यह सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी डिफेंस डील में से एक होगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 36 अरब डॉलर बताई जा रही है।
लंदन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस संभावित डील से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से अटकी पड़ी फाइटर जेट की कमी को दूर करने में राफेल अहम भूमिका निभा सकता है।
IISS के मुताबिक, भारत एक तरफ फ्रांस से राफेल खरीदने पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ अपने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय वायुसेना के लिए ये दोनों योजनाएं करीब 20 साल पहले शुरू हुई थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से इनकी रफ्तार धीमी रही। इस दौरान वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या लगातार घटती चली गई। जहां जरूरत 42 फाइटर स्क्वाड्रन की है, वहीं फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास केवल 29 फाइटर और ग्राउंड-अटैक स्क्वाड्रन ही बचे हैं।
ब्रिटिश थिंक टैंक ने यह भी संकेत दिया है कि राफेल के अलावा रूस अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर भारत को लुभाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन भारत की सुरक्षा जरूरतें मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियों पर आधारित हैं। चीन के पास अब 300 से अधिक J-20 स्टील्थ फाइटर जेट हैं और उसने J-35 मीडियम फाइटर को अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात करना भी शुरू कर दिया है। वहीं पाकिस्तान भी चीन से J-35 स्टील्थ फाइटर खरीदने की योजना पर काम कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत को चीन के साथ कम से कम एक बार और पाकिस्तान के साथ दो बार युद्ध जैसे हालात का सामना करना पड़ा है। ऐसे में भारतीय वायुसेना के लिए अत्याधुनिक और भरोसेमंद लड़ाकू विमानों की जरूरत और भी बढ़ गई है।
इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने तीनों सेनाओं के कई अहम रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है। शीर्ष अधिकारियों के हवाले से ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने का प्रस्ताव भी शामिल है।
गौरतलब है कि भारत ने 2012 में डसॉल्ट एविएशन से 126 राफेल खरीदने के लिए बातचीत शुरू की थी, लेकिन कीमत और अनुबंध की शर्तों के चलते यह सौदा अटक गया। बाद में 2016 में आपात जरूरत के तहत 36 राफेल खरीदे गए, जिनकी डिलीवरी 2020 से शुरू हुई। इन विमानों ने हालिया संघर्षों में अपनी मारक क्षमता साबित की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि भारतीय वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल मौजूद हैं और उनका पूरा इकोसिस्टम तैयार हो चुका है, इसलिए राफेल फिलहाल भारत की पहली पसंद बना हुआ है। वहीं AMCA भविष्य की जरूरतों को पूरा करेगा। इस तरह राफेल और AMCA एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक विमान के तौर पर देखे जा रहे हैं।
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