यह युद्धाभ्यास मई में भारत के साथ चार दिनों तक चले सैन्य तनाव के बाद पाकिस्तान वायुसेना का पहला बड़ा अभ्यास माना जा रहा है। उस दौरान भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर किए गए सटीक मिसाइल हमलों को रोकने में पाकिस्तानी एयर डिफेंस नाकाम रहा था। भारतीय वायुसेना ने 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, जबकि 10 मई को पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर भी सटीक हमले किए गए थे। इन घटनाओं में पाकिस्तान वायुसेना की प्रतिक्रिया सीमित रही और 7 मई के बाद उसके लड़ाकू विमान लगभग उड़ान भरते नहीं दिखे।
अब पाकिस्तान वायुसेना नए सिरे से अपनी तैयारियों को मजबूत करने में जुटी है। ISPR के अनुसार, ‘गोल्डन ईगल’ अभ्यास टू-फोर्स कंस्ट्रक्ट पर आधारित था, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस पर खास ध्यान दिया गया। इसके साथ ही बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी स्मार्ट तकनीकों को भी शामिल किया गया।
बयान में बताया गया कि अभ्यास के काइनेटिक चरण में ‘फर्स्ट-शूट, फर्स्ट-किल’ सिद्धांत पर आधारित स्विंग-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट शामिल किए गए। इन विमानों को लंबी दूरी की BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) एयर-टू-एयर मिसाइलों, एक्सटेंडेड-रेंज स्टैंड-ऑफ हथियारों और सटीक स्ट्राइक क्षमताओं से लैस किया गया था। इन्हें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) और एयर-टू-एयर रिफ्यूलर का भी समर्थन मिला।
हालांकि, पाकिस्तान के कई रक्षा विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी देते रहे हैं कि देश की एयर डिफेंस क्षमता भारतीय मिसाइलों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि भारतीय मिसाइलों के सामने चीन के एयर डिफेंस सिस्टम भी प्रभावी साबित नहीं हुए हैं। इसी कारण विशेषज्ञ पाकिस्तान को ड्रोन वॉरफेयर पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान वायुसेना ने हाल के महीनों में अपने ड्रोन बेड़े में तेजी से इजाफा किया है। ‘गोल्डन ईगल’ अभ्यास में भी ड्रोन को अहम भूमिका दी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य की रणनीति में पाकिस्तान ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।