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माघ मेला-2026: संगम पर बिना VIP प्रोटोकॉल के होंगे स्नान, 15 फरवरी तक चलेगा 44 दिन का आयोजन

Published on: December 28, 2025
Magh Mela-2026 Without Sangam
द देवरिया न्यूज़,लखनऊ : संगम तट पर प्रस्तावित माघ मेला-2026 की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रमुख स्नान पर्वों पर किसी भी तरह का वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा। गृह विभाग को इस संबंध में समय से स्पष्ट सूचना जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माघ मेला केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक अनुशासन और प्रशासनिक क्षमता का जीवंत उदाहरण है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

15–25 लाख कल्पवासी, करोड़ों श्रद्धालुओं की उम्मीद

सीएम योगी ने बताया कि संगम पर कल्पवास, स्नान और साधना की परंपरा भारतीय सांस्कृतिक चेतना की आत्मा है। इस वर्ष 15 से 25 लाख श्रद्धालु केवल कल्पवासी होंगे। महाकुंभ के सफल आयोजन के बाद माघ मेला-2026 को लेकर देश-दुनिया में खास उत्साह है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे, लेकिन किसी भी स्तर पर अव्यवस्था या असुविधा न होने पाए।

31 दिसंबर तक सभी तैयारियां पूरी करने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव-सचिव स्तर के अधिकारियों और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) को स्वयं मेला क्षेत्र में जाकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने 31 दिसंबर तक सभी तैयारियां पूरी करने के सख्त निर्देश दिए।

3 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा माघ मेला

बैठक में मंडलायुक्त प्रयागराज ने बताया कि माघ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक कुल 44 दिनों तक आयोजित होगा। इस दौरान पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख स्नान पर्व पड़ेंगे। पूरे मेला काल में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जबकि मौनी अमावस्या पर एक ही दिन में साढ़े तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

800 हेक्टेयर में फैला मेला क्षेत्र, 7 सेक्टर

मेला क्षेत्र का विस्तार बढ़ाकर लगभग 800 हेक्टेयर कर दिया गया है। सेक्टरों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 की गई है। साथ ही, स्नान घाटों की कुल लंबाई में पिछले माघ मेले की तुलना में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित स्नान की सुविधा मिल सके।

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