द देवरिया न्यूज़,बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक ऐसा गांव है, जिसका नाम वहां रहने वाले लोगों के लिए वर्षों से परेशानी और शर्मिंदगी का कारण बना हुआ है। गांव के नाम में जुड़े ‘तवायफ’ शब्द की वजह से ग्रामीणों को सामाजिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव का नाम रूपवार तवायफ है, जो अंग्रेजों के शासनकाल में रखा गया था। देश आज़ाद हो गया, लेकिन ग्रामीणों को अब तक इस नाम से मुक्ति नहीं मिल सकी है।
यह गांव सिकंदरपुर तहसील की खड़सरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है और जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है। लगभग एक हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों का कहना है कि नाम की वजह से बाहर जाते समय उन्हें अपना गांव बताने में संकोच होता है। सबसे बड़ी समस्या बेटा-बेटियों की शादी में आती है, क्योंकि गांव का नाम सुनते ही रिश्ते तय करने में अड़चन खड़ी हो जाती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह नाम युवाओं के भविष्य में बाधा बन रहा है। इसी कारण वे लंबे समय से गांव का नाम बदलकर देवपुर किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक को कई बार पत्र लिखे हैं।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में 18 मार्च 2025 को राष्ट्रपति को पत्र भेजकर नाम परिवर्तन की अपील की गई। इससे पहले 25 मई 2023, 30 नवंबर 2023 और 3 फरवरी 2024 को भी राज्यपाल और प्रधानमंत्री को पत्र भेजे गए थे। इसके अलावा वर्ष 2026 में बलिया के जिलाधिकारी और सिकंदरपुर के एसडीएम को भी ग्रामीणों ने प्रार्थना पत्र सौंपा था।
खड़सरा ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि पीयूष गुप्ता ने बताया कि गांव के लोग पिछले करीब 10 वर्षों से नाम बदलने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में तत्कालीन मंत्री रामगोविंद चौधरी से भी मुलाकात की गई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। उनका कहना है कि जिस तरह फैजाबाद का नाम अयोध्या और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किया गया, उसी तरह उनके गांव के नाम से भी ‘तवायफ’ शब्द हटाया जाना चाहिए।
पीयूष गुप्ता ने यह भी बताया कि गांव का नाम केवल बोलचाल में ही नहीं, बल्कि भू-राजस्व के रिकॉर्ड और नक्शों में भी रूपवार तवायफ के रूप में दर्ज है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी ही ग्राम पंचायत में पहले एक गांव का नाम ‘पूरा’ था, जिसे तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल वोरा के हस्तक्षेप से बदलकर सैय्यदपुरा कर दिया गया था। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उसी तरह उनके गांव को भी जल्द सम्मानजनक नाम मिलेगा।
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