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भारत की सेमीकंडक्टर छलांग: देश में डिजाइन हुई 2nm चिप, टेक्नोलॉजी में नया मील का पत्थर

Published on: February 9, 2026
India's semiconductor leap
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथ में दिखी एक बेहद छोटी-सी चिप, भारत की टेक्नोलॉजी ताकत की बड़ी कहानी कहती है। यह 2 नैनोमीटर (2nm) चिप है, जिसे अमेरिकी दिग्गज कंपनी क्वालकॉम ने भारत में अपने बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित इंजीनियरिंग केंद्रों में डिजाइन किया है। कंपनी ने इस चिप के सफल टेप-आउट—यानी डिजाइन के अंतिम चरण—की घोषणा की है, जिसे भारत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

क्यों खास है 2nm चिप?

2nm चिप को अगली पीढ़ी की सेमीकंडक्टर तकनीक कहा जा रहा है। इसकी ट्रांजिस्टर डेंसिटी बेहद अधिक है, जिससे यह मौजूदा 3nm और 5nm चिप्स की तुलना में ज्यादा तेज, ज्यादा कुशल और कम बिजली खपत वाली बनती है। दावा है कि इसके इस्तेमाल से ऊर्जा खपत में करीब 45% तक की कमी आ सकती है।

कहां होगा इस्तेमाल?


यह चिप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्वर, डेटा सेंटर, स्मार्टफोन और IoT डिवाइसों में इस्तेमाल के लिए तैयार की जा रही है। सबसे पहले इसके प्रीमियम स्मार्टफोन्स में आने की उम्मीद है। चर्चाओं में iPhone 18 सीरीज, Google Pixel की आगामी सीरीज और Samsung Galaxy S26 जैसे नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि सैमसंग के Exynos 2600 प्रोसेसर में भी 2nm प्रोसेस का इस्तेमाल हो सकता है।

सिर्फ क्वालकॉम नहीं, वैश्विक दौड़ में कई दिग्गज

2nm चिप पर काम करने वाली क्वालकॉम अकेली कंपनी नहीं है। TSMC (N2 प्रोसेस), सैमसंग, इंटेल और IBM जैसी कंपनियां भी इस एडवांस टेक्नोलॉजी को विकसित कर रही हैं। यह दिखाता है कि दुनिया में सेमीकंडक्टर को लेकर प्रतिस्पर्धा कितनी तेज हो चुकी है।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी बात?

क्वालकॉम का कहना है कि अमेरिका के बाहर भारत उसका सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट बेस है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, यह उपलब्धि साबित करती है कि भारत का डिजाइन इकोसिस्टम अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन चुका है। भारत अब सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं, बल्कि हाई-एंड टेक्नोलॉजी डिजाइन में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

क्या बदलेगी भारत की तकदीर?

सेमीकंडक्टर आने वाले समय की सबसे अहम तकनीकों में से एक है। अगर भारत इस क्षेत्र में डिजाइन और विकास दोनों में आगे बढ़ता है, तो वह अमेरिका और चीन जैसे देशों के बराबर खड़ा हो सकता है। इससे न सिर्फ भारतीय टैलेंट की वैश्विक साख बढ़ेगी, बल्कि भारत को टेक्नोलॉजी सुपरपावर बनने की दिशा में भी मजबूत बढ़त मिलेगी।

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