द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। इन दिनों सोना, चांदी और कॉपर (तांबा) की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है। बाजार में हर तरफ यही सवाल गूंज रहा है कि आखिर यह गिरावट कब तक जारी रहेगी, क्या अभी खरीदारी सही है या मौजूदा निवेश को बेच देना चाहिए। ज्वेलर्स के पास भी लगातार भाव पूछने के लिए फोन आ रहे हैं।
बीते साल यानी 2025 में कीमती धातुओं ने जबरदस्त रिटर्न दिया था। सोने ने करीब 70 फीसदी, चांदी ने 170 फीसदी और कॉपर ने 50 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा कराया। साल 2026 की शुरुआत भी तेजी के साथ हुई, लेकिन जनवरी के आखिरी हफ्ते से हालात पूरी तरह बदल गए।
29 जनवरी को शिखर, फिर तेज गिरावट
29 जनवरी 2026 को एमसीएक्स पर सोना 1.93 लाख रुपये प्रति ग्राम, चांदी 4.20 लाख रुपये प्रति किलो और कॉपर 1480 रुपये प्रति किलो के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। खासतौर पर चांदी की तेजी ने निवेशकों को चौंका दिया था—2 से 3 लाख रुपये तक पहुंचने में जहां एक महीना लगा, वहीं 3 से 4 लाख रुपये का सफर सिर्फ 10 दिनों में तय हुआ।
लेकिन 30 जनवरी से तस्वीर बदल गई। तीन दिन के भीतर कीमतों में तेज गिरावट आई। 8 दिनों के अंदर सोना करीब 23 फीसदी, चांदी लगभग 46 फीसदी और कॉपर करीब 18 फीसदी तक टूट गया। शुक्रवार को एमसीएक्स पर सोना 1.55 लाख, चांदी 2.49 लाख और कॉपर 1242 रुपये पर बंद हुआ।
गिरावट की वजह क्या है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व में नेतृत्व बदलाव इसके बड़े कारण हैं। डॉलर मजबूत होने से कमोडिटी अन्य देशों के लिए महंगी हो जाती है। इसके अलावा एमसीएक्स द्वारा मार्जिन बढ़ाए जाने से भी दबाव बना।
निवेशकों के लिए सलाह
विश्लेषकों का मानना है कि चांदी में ऊंचे मूल्यांकन के कारण आगे भी अस्थिरता रह सकती है, हालांकि लंबी अवधि में इसके बुनियादी कारक मजबूत हैं। जेपी मॉर्गन समेत कई विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है। पृथ्वी फिनमार्ट के मनोज कुमार जैन का कहना है कि जब तक बाजार में स्थिरता न लौटे, तब तक कीमती धातुओं से दूरी बनाए रखें और अगर निवेश करना ही है तो एकमुश्त की बजाय किस्तों में करें। फिलहाल, निवेशकों के लिए धैर्य और सावधानी ही सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है।
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