द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की रूपरेखा सार्वजनिक कर दी गई है। इसे दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि इस फ्रेमवर्क से भारतीय निर्यातकों को अमेरिका जैसे बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी, जबकि देश के संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह सुरक्षा की गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौते में भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस उत्पादों को संरक्षण के दायरे में रखा गया है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों और ग्रामीण आजीविका पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
क्या है अंतरिम समझौते का ढांचा
संयुक्त बयान के अनुसार, भारत और अमेरिका इस अंतरिम फ्रेमवर्क को तुरंत लागू करेंगे और इसे अंतिम व्यापार समझौते में बदलने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले व्यापार तंत्र की नींव बताया है। यह पहल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुरू हुई व्यापार वार्ताओं का अगला चरण मानी जा रही है।
किन सेक्टरों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
सरकार के मुताबिक, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार के द्वार खोलेगा। एमएसएमई, किसान और मछुआरे इसके सबसे बड़े लाभार्थी होंगे। निर्यात बढ़ने से रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए।
टेक्सटाइल, परिधान, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, आर्टिजन उत्पाद और मशीनरी सेक्टर को टैरिफ कटौती का सीधा लाभ मिलेगा। जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरा और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ शून्य करने की योजना है, जबकि ऑटो पार्ट्स को टैरिफ रेट कोटा के तहत राहत मिलेगी।
टैरिफ और भारतीय प्रतिबद्धताएं
अमेरिका 7 फरवरी से भारतीय वस्तुओं पर लगाई गई अतिरिक्त 25 प्रतिशत ड्यूटी हटाएगा। समझौता पूरा होने पर पारस्परिक टैरिफ दर घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है। बदले में भारत ने रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी कार्यकारी आदेश के अनुरूप प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही, दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने के फ्रेमवर्क पर भी सहमति दी है।
अमेरिका से क्या खरीदेगा भारत
संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी उत्पाद और कोकिंग कोल शामिल हैं। डिजिटल व्यापार को आसान बनाने और नियमों को स्पष्ट करने पर भी सहमति बनी है।
सरकार ने इस अंतरिम व्यापार समझौते को भारत-अमेरिका साझेदारी के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे निर्यात, निवेश, तकनीक और रक्षा सहयोग को नई गति मिलेगी और जल्द ही व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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