Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की दलील, कहा—चुनाव से पहले बंगाल को किया जा रहा टारगेट

Published on: February 5, 2026
Supreme Court on voter list revision
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख रही हैं। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया को केवल तीन महीनों में पूरा करने की कोशिश की जा रही है, जबकि आमतौर पर इस तरह का काम वर्षों में होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी जल्दबाजी किसलिए है। मुख्यमंत्री का आरोप है कि इस प्रक्रिया में नाम जोड़ने के बजाय सिर्फ मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर खतरा पैदा हो रहा है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि इससे पहले 19 जनवरी को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रक्रिया से जुड़ी कठिनाइयों को विस्तार से कोर्ट के सामने रखा था। सीजेआई ने स्पष्ट किया कि अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी निर्दोष नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है, ताकि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो।
इसके बाद ममता बनर्जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की बेंच पर पूरा भरोसा और सम्मान है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार न्याय दरवाजों के पीछे रोता हुआ नजर आता है। ममता ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर कई बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा, लेकिन उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने यह भी उल्लेख किया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अलग से रिट याचिका दाखिल की है और राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में देश के शीर्ष वकील—कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता—पेश हो रहे हैं। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि वह खुद राज्य की जमीनी हकीकत अदालत के सामने रखना चाहती हैं, क्योंकि वह सीधे तौर पर बंगाल का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाताओं से आधार कार्ड के साथ अतिरिक्त प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में निवास या जाति प्रमाण पत्र तक को मान्य नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इसे असमान और भेदभावपूर्ण प्रक्रिया बताया। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि इस दबाव के चलते बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) तक मानसिक तनाव में हैं।
ममता ने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले एसआईआर लागू कर पश्चिम बंगाल को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी है।

इसे भी पढ़ें : संसद में राहुल गांधी के बयान पर हंगामा, डोकलाम मुद्दे पर रूल 349 समेत नियमों की चर्चा

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply