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संतूर बना देश का नंबर-1 साबुन ब्रांड, लाइफबॉय को पछाड़ने का विप्रो का दावा

Published on: February 4, 2026
Santoor becomes country's number-1
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। विप्रो कंज्यूमर केयर एंड लाइटिंग (WCCL) ने दावा किया है कि उसका प्रमुख साबुन ब्रांड संतूर अब भारत का सबसे बड़ा साबुन ब्रांड बन गया है। कंपनी के अनुसार, संतूर ने हिंदुस्तान यूनिलीवर के लोकप्रिय ब्रांड लाइफबॉय को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
विप्रो कंज्यूमर केयर का कहना है कि वर्ष 2025 में संतूर ने करीब 2,850 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जिससे वह भारतीय साबुन बाजार में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया। इस रैंकिंग में लाइफबॉय दूसरे और लक्स तीसरे स्थान पर बताए जा रहे हैं। हालांकि, कंपनियों के लिए अलग-अलग ब्रांड का रेवेन्यू सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं होता, ऐसे में इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि करना आसान नहीं है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, WCCL का दावा है कि उसने कई स्रोतों से आंकड़े जुटाए हैं और उसे अपने लीडरशिप दावे पर पूरा भरोसा है। कंपनी के सीईओ विनीत अग्रवाल ने कहा, “संतूर और लाइफबॉय के बीच अब अच्छा-खासा अंतर है।”
हालांकि, मार्केट रिसर्च एजेंसी AC Nielsen के जनवरी से नवंबर तक के आंकड़े कुछ अलग तस्वीर पेश करते हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, संतूर की मार्केट हिस्सेदारी 8.7 प्रतिशत रही, जबकि लाइफबॉय की 12.1 प्रतिशत और लक्स की 12.2 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई।
इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए विनीत अग्रवाल ने कहा कि संतूर की मजबूती खासतौर पर ग्रामीण बाजारों में है, जिसे AC Nielsen का पैनल पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता। उन्होंने बताया कि संतूर की बिक्री आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में बेहद मजबूत है, लेकिन इन क्षेत्रों को सर्वे में पर्याप्त वेटेज नहीं मिल पाता।
वहीं, हिंदुस्तान यूनिलीवर के एक प्रवक्ता ने इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी अपने ब्रांड्स की प्रतिस्पर्धी स्थिति का आकलन करने के लिए विभिन्न डेटा स्रोतों पर नजर रखती है। इनमें प्रकाशित वित्तीय नतीजे और Nielsen व Kantar जैसे संस्थानों के आंकड़े शामिल हैं। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कंपनी व्यक्तिगत ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी साझा नहीं करती और फिलहाल वह एक “क्लोज्ड पीरियड” में है।
संतूर के इस दावे ने भारतीय एफएमसीजी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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