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नीतीश कुमार के विवादित कृत्य पर जावेद अख्तर का तीखा हमला, बोले—यह धर्म नहीं, महिला सम्मान का मुद्दा

Published on: December 24, 2025
On the controversial act of Nitish Kumar
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : जाने-माने गीतकार और लेखक जावेद अख्तर एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक विवादित घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला डॉक्टर का हिजाब खींचने का आरोप लगा है। जावेद अख्तर ने इसे न केवल गलत, बल्कि महिला सम्मान के खिलाफ बताया है।

‘नास्तिक होना बदतमीजी का लाइसेंस नहीं’

इंडिया टुडे से बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति किसी धर्म में विश्वास न करता हो या खुद को नास्तिक मानता हो, इससे उसे किसी दूसरे व्यक्ति को अपमानित करने का अधिकार नहीं मिल जाता। उन्होंने सवाल उठाया,
“अगर मैं नास्तिक हूं और धर्म में विश्वास नहीं करता, तो क्या इसका मतलब यह है कि मैं मंदिर, मस्जिद या चर्च में जाकर लोगों को जबरन बाहर निकालने लगूं?”
उन्होंने कहा कि किसी भी विचार या प्रथा का विरोध तर्क और संवाद से किया जाना चाहिए, न कि जबरदस्ती या अपमान के जरिए।

महिला के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य

जावेद अख्तर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला सिर्फ एक मुस्लिम महिला का नहीं है, बल्कि किसी भी महिला के सम्मान से जुड़ा है।
“खासकर किसी महिला के साथ, चाहे वह किसी भी धर्म की हो, ऐसा व्यवहार नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए पूछा कि भारत के कई हिस्सों में हिंदू महिलाएं परंपरा के तहत घूंघट करती हैं, तो क्या कोई जाकर उनका घूंघट खींच सकता है?
“कोई भी ऐसा कैसे कर सकता है?”—यह सवाल उन्होंने सीधे तौर पर उठाया।

‘अंजाम का डर नहीं था’


जावेद अख्तर ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार को यह पता था कि इस तरह की हरकत करने पर उन्हें किसी तरह का अंजाम नहीं भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी इंसानियत है, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

धर्म नहीं, इंसानियत का सवाल

गीतकार ने जोर देकर कहा कि यह विवाद हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा नहीं है।
“यह एक महिला की गरिमा और अधिकार का सवाल है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे जोड़ा कि कोई भी सभ्य व्यक्ति—चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, यहूदी हो, पारसी हो या बौद्ध—अगर महिलाओं की गरिमा का सम्मान करता है, तो उसे इस घटना पर आपत्ति होनी चाहिए।
जावेद अख्तर के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे महिला सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर नीतीश कुमार से जवाब और माफी की मांग तेज कर दी है।

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