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स्कूल मर्जर के विरोध में फूटा शिक्षकों का गुस्सा: RTE एक्ट और नई शिक्षा नीति के खिलाफ बताया फैसला, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

Published on: July 8, 2025
Against School Merger in

देवरिया। स्कूल युग्मन (मर्जर) नीति के खिलाफ जिले के शिक्षक एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले सोमवार को सैकड़ों शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने के बाद तख्तियां और नारेबाजी करते हुए बीएसए कार्यालय से डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार के विद्यालय मर्जर निर्णय को “शिक्षा विरोधी और RTE एक्ट के खिलाफ” बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग की।


क्या है स्कूल युग्मन नीति और क्यों हो रहा विरोध?

राज्य सरकार द्वारा अप्रैल 2025 की छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों का विलय (युग्मन) किया जा रहा है। इस योजना के तहत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के बड़े स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों का तर्क है कि इससे खासकर ग्रामीण और दलित बच्चों को स्कूल पहुंचने में कठिनाई होगी, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ेगी


शिक्षकों के प्रमुख तर्क और मांगें

महासंघ के जिला संयोजक जयशिव प्रताप चन्द ने कहा कि ज्ञापन में युग्मन नीति के शैक्षिक दुष्परिणामों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे गरीब, दलित और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों का शिक्षा का अधिकार (RTE 2009) प्रभावित होगा।

जिला सह-संयोजक विवेक मिश्रा ने मर्जर आदेश को “मनमाना” और “गैर-शैक्षिक दृष्टिकोण” करार देते हुए कहा कि यदि इसे वापस नहीं लिया गया, तो महासंघ राज्य स्तर पर आंदोलन करेगा।

कोर कमेटी सदस्य गोविन्द सिंह ने कहा कि स्कूल केवल भवन नहीं, ग्राम संस्कृति और ज्ञान का केंद्र होते हैं। उन्होंने चेताया कि आदेश RTE एक्ट 2009 के खिलाफ है और विशेषकर बालिकाएं बढ़ी दूरी के कारण शिक्षा से वंचित हो सकती हैं।

अशोक तिवारी ने बताया कि मर्जर की नीति अप्रैल 2025 के आंकड़ों पर आधारित है, जबकि कई विद्यालयों में छात्र संख्या अब बढ़ चुकी है। उन्होंने मांग की कि सितंबर 2025 तक हर विद्यालय को छात्र वृद्धि का अवसर दिया जाए

आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि यह नीति ग्रामीण बच्चों के साथ अन्याय है, और इससे शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।


प्रदर्शन में विभिन्न शिक्षक संगठनों की सहभागिता

प्रदर्शन में अनुदेशक संघ, शिक्षामित्र संघ, महिला शिक्षक संघ, विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन, अटेवा जैसे संगठनों के सैकड़ों सदस्यों ने हिस्सा लिया।

प्रमुख वक्ताओं में रहे:

  • विज्ञान सिंह, जिला अध्यक्ष, विशिष्ट बीटीसी एसोसिएशन

  • नीलम सिंह, जिला अध्यक्षा, महिला शिक्षक संघ

  • मदन पटेल, मण्डलीय अध्यक्ष, अटेवा

  • अभिषेक गुप्ता, जिला अध्यक्ष, अनुदेशक संघ

  • जय सिंह यादव, वरिष्ठ शिक्षक नेता


निष्कर्ष:

देवरिया में स्कूल युग्मन नीति को लेकर शिक्षकों का विरोध धीरे-धीरे तेज होता जा रहा है। शिक्षकों ने साफ कहा है कि यह फैसला शिक्षा के अधिकार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के खिलाफ है। यदि प्रशासन ने उनकी बात नहीं मानी, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करने को तैयार हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस विरोध को कैसे संभालती है।

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